Monday, June 30, 2008

कुछ मशहूर शायरों से !

इंशा अब इन्ही अजनबियों में चैन से सारी उम्र कटे,
जिनके कारण बस्ती छोड़ी, नाम न लो उन प्यारों का

कुछ मशहूर शायरों से !

वो अगर मुझको न भूलें, तो भुलाएँ किसको
हम अगर उनको भुला दें तो किसे याद करें !

पसीना मौत का माथे पे आया, आईना लाओ
हम अपनी जिंदगी की आखिरी तस्वीर देखेंगे !

अँधेरा ही भला है, मैं इसी की क़द्र करता हूँ ,
शबे महताब में अक्सर हुई हैं चोरियां मेरी !

मंजिल पर वो क्या पहुंचेंगे, हर गाम पे धोखा खायेंगे
वो काफले वाले, जो अपने सरदार बदलते रहते हैं !

दुश्मनी जम कर करो पर, इतनी गुंजाईश रहे ,
फिर कभी जब दोस्त बन जायें तो शर्मिंदा न हो

दिल टूटने से, थोडी सी तकलीफ तो हुई ,
लेकिन तमाम उम्र का आराम मिल गया !

Sunday, June 29, 2008

१९७८ की डायरी के कुछ पन्ने !

भिन्न भिन्न शायरों के लिखे हुए ये शेर मुझे बहुत पसंद थे, स्टुडेंट लाइफ में लिखे इन शेरों पर इनके लेखक का नाम नहीं है ! क्षमा मांगते हुए उनके शेरों को यहाँ दे रहा हूँ !

"हमने जब मौसमे -बरसात से चाही तौबा
बादल इस जोर से बरसा कि इलाही तौबा !''

"है मुमकिन दुश्मनों की दुश्मनी पर सबर कर लेना
मगर यह दोस्तों की बेरुखी देखी नही जाती !"

"भुलाई नहीं जा सकेगीं ये बातें ,
बहुत याद आयेंगे हम याद रखना "

" अभी से क्यों छलक आए तुम्हारी आँख में आंसू
अभी छेडी कहाँ है दास्ताने जिंदगी हमने "

" दुश्मनों से प्यार होता जाएगा
दोस्तों को आजमाते जाइए "

" हमें कुछ काम अपने दोस्तों से आ पड़ा यानी
हमारे दोस्तों के बेवफा होने का वक्त आया "

" तेरी इस बेवफाई पर फ़िदा होती है जां मेरी
खुदा जाने अगर तुझमे वफ़ा होती तो क्या होता"